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Meta Muse Image: प्राइवेसी विवाद के बाद Meta ने लॉन्च के 4 दिन में हटाया Instagram का AI फीचर

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आलम की खबर: Meta ने Instagram पर लॉन्च किया Muse Image AI फीचर महज चार दिन बाद ही बंद कर दिया। यूजर्स की प्राइवेसी, AI Deepfake और डिजिटल क्लोनिंग को लेकर उठे विवाद के बाद कंपनी ने बड़ा फैसला लिया।

नई दिल्ली, 11 जुलाई। आलम की खबर: सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Meta ने Instagram के लिए लॉन्च किए गए अपने नए AI फीचर Muse Image को लॉन्च के महज चार दिन बाद ही बंद कर दिया है। यह फीचर 8 जुलाई 2026 को पेश किया गया था और इसका मकसद यूजर्स को AI की मदद से नई क्रिएटिव तस्वीरें बनाने का विकल्प देना था। हालांकि, फीचर लॉन्च होते ही यह विवादों में घिर गया। यूजर्स ने आरोप लगाया कि उनकी सार्वजनिक इंस्टाग्राम तस्वीरों का इस्तेमाल बिना स्पष्ट अनुमति के AI मॉडल तैयार करने में किया जा रहा है, जो निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इस फीचर की मदद से कोई भी व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक Instagram अकाउंट का यूजरनेम लिखकर उस प्रोफाइल की तस्वीरों के आधार पर नई AI इमेज तैयार कर सकता था। इसी सुविधा ने सबसे बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। लोगों का कहना था कि इससे किसी की डिजिटल पहचान की नकल करना आसान हो सकता है और फर्जी तस्वीरें बनाकर धोखाधड़ी, बदनामी तथा Deepfake जैसे अपराध बढ़ सकते हैं। सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना के बीच डिजिटल अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस फीचर पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि AI तकनीक का उपयोग तभी स्वीकार्य है जब संबंधित व्यक्ति की स्पष्ट सहमति ली जाए। मामला केवल आम यूजर्स तक सीमित नहीं रहा। हॉलीवुड की प्रमुख टैलेंट एजेंसी CAA ने भी Meta के इस फीचर का विरोध किया। एजेंसी का कहना था कि कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीरों का AI मॉडल में उपयोग बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता। बढ़ते विवाद के बाद Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग के माध्यम से घोषणा की कि Muse Image फीचर को फिलहाल हटा दिया गया है। कंपनी ने कहा कि इस टूल का उद्देश्य रचनात्मक अनुभव देना था, लेकिन संभावित दुरुपयोग और यूजर्स से मिले फीडबैक को देखते हुए इसे बंद करने का निर्णय लिया गया। अब यदि कोई यूजर Meta AI में किसी Instagram अकाउंट का नाम देकर AI इमेज बनाने का प्रयास करेगा तो चैटबॉट ऐसा करने से इनकार कर देगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी अकाउंट और 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स पहले से ही इस फीचर के दायरे से बाहर थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला AI तकनीक के विकास और यूजर्स की निजता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में AI कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे नई तकनीक विकसित करें, लेकिन उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और सहमति से कोई समझौता न हो।

AI की रफ्तार, लेकिन भरोसा सबसे जरूरी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से उससे जुड़े कानूनी और नैतिक सवाल भी सामने आ रहे हैं। Meta का यह फैसला बताता है कि केवल नई तकनीक लॉन्च करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव और यूजर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही आवश्यक है। आने वाले समय में AI से जुड़े नियम और अधिक सख्त हो सकते हैं।

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